-Andy Weir

About the book – Andy Weir ne apne blog me ek story likhi thi jo itni famous aur inspiring thi ki is par elk block buster movie ban gayi. Who should read this book – Har ek science student. Science fictional lover Science lover. Author ke baare me – Andy weir ek American novelist aur ek successful computer programmer hai jinhone ye book likhi hai. Inhe 2016 me John Campbell award mila hai new writer ke liye.
क्या आपने भी मार्स जाने के लिए नासा का टिकट बुक करा लिया है? क्योंकि ईलॉन मस्क तो यही दावा कर रहे है कि 2026 तक वो मार्स पर इंसानों की कॉलोनी बना देंगे. आपको क्या लगता है ? क्या ये पॉसिबल है और अगर पॉसिबल है भी तो क्या आप मार्स पर जाने वाली फर्स्ट ह्यूमन सिविलाईजेशन में शामिल होना चाहेंगे? अब तक तो हमने यही सुना है कि एक दिन में 24 घंटे होते है और एक साल में 365 दिन. लेकिन अचानक से अगर आपका एक दिन 25 घंटे का हो जाए और एक साल में 687 दिन तो आपको कैसा लगेगा?
कुछ सालों से साइंस मार्स पर कुछ ज्यादा ही फ़ोकस कर रहा है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है इसकी वजह क्या है? क्या मार्स के पास भी धरती की तरह अपना मून है? क्या वहां भी आसमान का रंग सेम होगा? आखिर नासा को इतने करोड़ अकेले मार्स पर खर्च करने की जरूरत क्या है? भला उनकी ऐसी भी क्या मजबूरी है?
चलिए आज हम साइंस फिक्शन बुक मार्शीयन जो एंडी वियर ने लिखी है उसमें से आपके सवालों का जवाब देने की कोशिश करते है.
इस कहानी की शुरुवात होती है 6 एस्ट्रोनॉट के साथ जो मार्स पर Ares 3 के मिशन पर जाते है.
ये छह एस्ट्रोनॉट बड़े शिद्दत के साथ अपना मिशन कम्प्लीट करने में जुट जाते हैं और मार्स की मिटटी के सैंपल लेते है कि तभी उन्हें एक मैसेज मिलता है कि वो लोग जिस लोकेशन पर मौजूद है वहां एक बड़ा तूफ़ान आने वाला है.
सोचिये अगर आपके साथ ऐसा होता तो क्या होता? मान लो आप मार्स पर है और अचानक एक बड़ा तूफ़ान आपकी ओर बढ़ रहा है जोकि धरती के तूफ़ान जैसा बिल्कुल नहीं है और इस तूफ़ान के बारे में आपको ज्यादा इन्फोर्मेशन भी नहीं है. बस आपको इतना पता है कि कुछ खतरनाक होने वाला है.
तो उन छह एस्ट्रोनॉट के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था.
उन सबको अपना मिशन बीच में बंद पड़ा और सारे के सारे तेज़ी से अपनी स्पेसशिप MAV (Mars ascent Vehicle) की तरफ दौड़ने लगते है. उनका स्पेसशिप 150 केपीएच की विंड का प्रेशर हैंडल कर सकता है लेकिन तूफ़ान की वजह से विंड की स्पीड 175 केपीएच हो गई थी. मिशन के छठे दिन नासा की तरफ से उन्हें मिशन रोक देने का ऑर्डर मिलता है. उनके पास वक्त बहुत कम था. स्पेसशिप किसी भी वक्त डिस्ट्रॉय हो सकती थी और इस सूरत में वो हमेशा-हमेशा के लिए मार्स पर फंस सकते थे और वो भी बिना किसी सपोर्ट सिस्टम के.
तूफ़ान से बचने के लिए सभी स्पेसशिप की तरफ भाग रहे होते है कि तभी उनमें से एक एस्ट्रोनॉट और botanist मार्क वॉटनी किसी चीज़ से टकराकर तूफ़ान में खो जाते है. मिशन के कमांडर लुईस मार्क को ढूँढने की पूरी कोशिश करते हैं पर मार्क उन्हें कहीं नज़र नहीं आते. सबको यकीन हो जाता है कि मार्क शायद उस खौफ़नाक तूफ़ान में फंसकर मर चुके है और अब उन्हें मार्क के बिना ही धरती पर लौटना होगा. इस तरह सब लोग वहां से निकल जाते है.
तूफ़ान के शांत होने पर मार्स की धरती पर मार्क के नज़र आते है. वो जमीन पर पेट के बल पड़े हुए थे. तभी उनका ऑक्सीजन अलार्म बज उठता है जिसे सुनकर मार्क होश में आते है. जी हाँ, अच्छी खबर ये है कि मार्क जिंदा है पर बुरी खबर ये है कि वो मार्स पर एकदम अकेले है. होश में आने के बाद उन्हें पता चलता है कि सैटलाईट की एक रॉड उनके पीठ में नीचे की ओर घुस गई है जिससे उनके स्पेस सूट में छेद हो गया है और बॉडी में लगे जख्म साफ-साफ दिखाई दे रहे है.
मार्क का ध्यान अपनी चोट पर जाता है. वहाँ से बहुत ज्यादा खून बह रहा था. ये खून बहकर उनके स्पेससूट के छेद तक आता है और फौरन सूख जाता है क्योंकि उसमें से पानी भाप बनकर उड़ जाता है. एयरफ्लो और कम प्रेशर की वजह से सूखे हुए खून ने स्पेससूट के होल को सील कर दिया था. ये देखते ही मार्क तुरंत अपने कैंप की तरफ चले जाते है. वो जल्द से जल्द इस चोट को ठीक करना चाहते थे. उन्हें डर था कि कहीं कोई इन्फेक्शन ना हो जाए.
कैंप के अंदर मार्क सैटलाईट की रॉड को अपने पेल्विस से खींचकर बाहर निकालते है और फिर चोट वाली जगह पर एंटीसेप्टिक लगाकर स्टिच कर देते है. अब उनके सामने एक बड़ा सवाल ये था कि वो अकेले मार्स पर क्या करेंगे? उनके साथी उन्हें मरा हुआ समझकर धरती की तरफ निकल चुके थे और ऊपर से तूफ़ान की वजह से सारी सैटलाईट भी तबाह हो चुकी थी. ऐसे में उनके पास नासा से कम्यूनिकेट करने का कोई रास्ता नहीं बचा था. मार्क के सामने अब एक ही ऑप्शन बचा था. अब उन्हें चार साल मार्स पर अकेले रहना होगा जब तक कि अगली मार्स मिशन टीम वहां ना पहुँच जाए. लेकिन दिक्कत ये थी कि बिना राशन-पानी और ऑक्सीजन के वो चार साल तक जिंदा कैसे रहेंगे?
मार्क को ऑक्सीजन की ज्यादा टेंशन नहीं थी क्योंकि नासा का ऑक्सीज़ेनेटर तूफ़ान में बच गया था और वो कार्बन डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन बना सकता था. असली मुद्दा था खाना और पानी बिना खाए-पिए भला कब तक जिंदा रहा जा सकता था?
फिलहाल मार्क के पास अपने और अपने 5 साथियों के हिस्से का खाना बचा हुआ था. मार्क कैलकुलेट करना शुरू करते है कि अगर वो एक वक़्त में खाने का 3/4 हिस्सा भी खाते है तो भी 400 दिन तक ही खा पायेंगे और अगला मार्स मिशन जोकि चार साल बाद होना था यानि 1460 दिन के बाद इसका मतलब था कि उनके पास 1000 दिनों का खाना कम पड़ रहा था.
मार्क एक बोटनिस्ट और मैकेनिकल इंजीनियर थे. वो सोचते है क्यों ना अपनी बोटनिस्ट स्किल यूज़ की जाए और मार्स की मिट्टी पर पौधे उगाने की कोशिश की जाए. मार्स की मिट्टी में धरती जैसे एलिमेंट्स तो है पर पानी, बैक्टीरियल एक्टिविटी और एनिमल लाइफ से मिलने वाला न्यूट्रीएंट्स नहीं है. इस मिशन का एक गोल ये पता करना था कि धरती और मार्स की मिट्टी के कॉम्बीनेशन में प्लांट्स कैसे ग्रो करते है.
मार्क के पास धरती से लाई हुई थोड़ी सी मिट्टी थी पर उससे भी 1000 दिन के लिए खाना नहीं जुट सकता था. उनके पास कुछ आलू थे जो वो मार्स पर उगाने के लिए लाये थे. मार्क ने डिसाइड किया कि वो मार्स की मिट्टी को प्लांट उगाने लायक बनायेगे. लेकिन एक प्रॉब्लम थी. मार्स की मिट्टी में धरती की मिट्टी जैसे प्रोटीन और बायो मैटर नहीं थे.
मार्क इसका भी जुगाड़ निकाल लेते है. वो पुराने मिशन के वैक्यूम सील्ड ह्यूमन वेस्ट यानि पॉटी वगैरह इक्कठा करके उसमें अपनी पॉटी मिलाकर मैन्योर यानि खाद बना लेते है. फिर इस खाद को वो एक जगह पर फैलाकर उसके ऊपर धरती से लाई मिट्टी डाल देते है ताकि धरती से लाई हुई मिट्टी में जो बैक्टीरिया है वो उसमें बढ़ सके. इतना सब कुछ करने के बाद फिर एक सवाल खड़ा होता है, पौधे उगाने के लिए पानी चाहिए जो उनके पास नहीं है.
पानी बनाने के लिए मार्क अपनी सारी केमिस्ट्री की नॉलेज यूज़ करते है. पानी का फ़ॉर्मूला होता है H2O. ऑक्सीजन तो ऑक्सीज़नेटर से बना सकते थे पर हाइड्रोजन प्रोड्यूस करने का कोई तरीका नहीं था.
लेकिन मार्क भी आसानी से हार मानने वाले नहीं थे. वो दोबारा कोशिश करते है. इस बार बड़ी सावधानी से observe करके सारी केलकुलेशन करके वो पानी बना लेते है. फिर कुछ ही दिनों बाद मार्स की धरती पर पहला पौधा उगता है जिसे देखकर मार्क की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता.
जहाँ एक ओर मार्क मार्स पर सर्वाइव करने की कोशिश करते नज़र आते है वहीं दूसरी तरफ धरती पर नासा मार्क की डेथ एनाउंस कर चुका होता है. यहाँ तक कि मार्क को एक ऑफिशियल फ्यूनरल भी दे दिया गया है. लेकिन अगले ही दिन उनके ऑपरेटर सैटलाईट इमेज से पता चलता है कि उनके इक्विपमेंट मार्स के सरफेस पर एक जगह से दूसरी जगह पहुँच चुके है. ये वही इक्विपमेंट थे जो मार्क ने शिफ्ट किये थे.
जब ये बात नासा के ऑपरेटर को पता चलती है तो वो अपनी टीम को इस बारे में इन्फॉर्म करती है और सब समझ जाते है कि मार्क मरे नहीं बल्कि जिंदा है. लेकिन फिर उन्हें ख्याल आता है कि अगर वो मार्क को बचाने के लिए एक और मिशन लॉन्च भी करते है तो भी मार्क के जिंदा रहने की उम्मीद कम थी क्योंकि इतने दिन खाने और पानी के बगैर वो सर्वाइव नहीं कर पायेंगे. क्योंकि मिशन की तैयारीयों में ही 3 महीने का वक्त लग जायेगा और फिर धरती से मार्स तक पहुँचने में 9 महीने लगते थे यानि तब तक एक साल पूरा हो चुका होगा.
मार्स पर मार्क आलू उगाने में कामयाब रहे थे. अब वो जल्द से जल्द किसी भी तरह नासा से कांटेक्ट करना चाहते थे. मार्क को मार्स में घूमते-घुमते एक जगह पर पाथ फाइंडर मिलता है. इस पाथ फाइंडर का बहुत साल पहले नासा से कनेक्शन टूट गया था.
नासा की टीम जब मार्क की लोकेशन ट्रैक करती है तो उन्हें पता चलता है कि मार्क पाथ फाइंडर तक पहुँच गए है. लेकिन दिक्कत ये थी कि पाथ फाइंडर का सिस्टम काफी पुराना था जिसके जरिए सिर्फ इमेज भेजी जा सकती थी. मार्क पाथ फाइंडर को ठीक करने में जुट जाते है कि तभी पाथ फाइंडर धरती की तरफ पॉइंट करता है. यानि अब मार्क भी समझ जाते है कि नासा को उनके जिंदा होने का पता चल गया है और इसीलिए वो उन्हें सिग्नल भेज रहे थे. मार्क बड़े खुश होते है. उनके जिंदा बचने की उम्मीद बढ़ गई थी. मार्क ने तीन बोर्ड लगाये जिन पर लिखा था:
फर्स्ट बोर्ड पर लिखा था: क्या आपको मेरे सिग्नल मिल रहे है? दूसरे बोर्ड पर लिखा था: yes और तीसरे बोर्ड पर लिखा था: no
मार्क ने ये तीनों बोर्ड नासा से कम्यूनिकेट करने के लिए बनाये थे. जैसे कि अगर उन्हें नासा का सिग्नल मिलता है तो वो कैमरे को yes लिखे बोर्ड की तरफ पॉइंट कर देंगे जैसा मार्क ने सोचा था वैसा ही हुआ. जी हाँ, नासा मार्क के सिग्नल रिसीव कर रहा था और मार्क को उम्मीद बंधने लगी थी कि वो अब बच जायेंगे.
मार्क कुछ और मैसेज़ लिखकर कम्यूनिकेट करते है और नासा उसे इन्फॉर्म करता है कि उसके लिए खाना और जरूरी सामान वो लोग धरती से भिजवा रहे है. मार्क को ये भी पता चलता है कि नासा ने अभी तक बाकि के उन पांचो एस्ट्रोनॉट को ये नहीं बताया था कि मार्क जिंदा है क्योंकि वो अभी स्पेस में ही थे यानि वो मार्स से अभी धरती पर वापस नहीं पहुंचे थे.
कुछ दिनों बाद नासा अपना फैसला बदल देती है और उनके क्रू के साथियों को मार्क के जिंदा होने की न्यूज़ देती है और ये भी इन्फॉर्म करती है कि मार्क के लिए हेल्प भेजी जा रही है. सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक एक दिन उस जगह पर एक बड़ा धमाका होता है जहाँ मार्क ने आलू उगाये थे. इस धमाके की वजह से सब कुछ तबाह हो जाता है. अब मार्क के दोबारा आलू उगाने का कोई तरीका नहीं बचता.
जब ये बात नासा को पता चलती है तो वो लोग मार्क को मैसेज़ देते है कि उसे अपनी डाईट और भी कम करनी होगी ताकि हेल्प पहुंचने तक वो किसी तरह जिंदा रह सके. नासा जल्द से जल्द लॉन्च की तैयारियों में जुट जाती है और मार्क के लिए खाना और जरूरी सामान स्पेसशिप में रखवा देती है. टाइम कम होने की वजह से वो लोग टेस्टिंग फेज छोड़ देते है जिसकी वजह से स्पेसशिप लॉन्च होने के कुछ ही देर बाद ब्लास्ट हो जाती है.
मार्क को जब ये खबर मिलती है तो वो बुरी तरह निराश हो जाते है. वो अपने पेरेंट्स और अपने कमांडर lewis के लिए मैसेज भेजते है और अपनी एक फ्रेंड को भी मैसेज भेजते है जिसमें वो लिखते है:
मेरे माता पिता का ध्यान रखना और उनकी – खबर लेते रहना. अगर मैं मर गया तो उन्हें खोज-र बताना कि हमने मार्स पर कैसे वक्त गुज़ारा था. मैं जानता हूँ कि किसी माता पिता को उनके बेटे की मौत की खबर देना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है पर मैं ये काम तुम पर छोड़ रहा हूँ. मैं मरते दम तक हार नहीं मानूंगा. अंजाम जो भी हो, मैं तैयार हूँ.”
दूसरा मैसेज उन्होंने अपने कमांडर lewis को भेजा था जिसमें लिखा था:
मैंने आपके साथ 2 साल ट्रेनिंग की है और आपको काफी अच्छे से जानता हूँ इसलिए मुझे पता है कि इस हादसे के लिए आप खुद को दोष दे रहे होंगे लेकिन मैं आपको बता दूं कि इसमें आपका कोई कसूर नहीं है. हालात बेहद मुश्किल थे पर इतना सब कुछ होते हुए भी आपने अपने कमांडर होने का फ़र्ज़ निभाया और सही फ़ैसला लिया. एक क्रू मेंबर की जान बचाने के लिए सबकी जान खतरे में नहीं डाली जा सकती थी.’
नासा की उम्मीद टूट चुकी थी पर मार्क को वापस लाने के लिए चाईना ने उनकी हेल्प करने का फैसला लिया. चाइना ने एक सीक्रेट बूस्टर rocket बनाया और नासा को ऑफर किया. इसी दौरान चाईना के एस्ट्रोडाइनामिसिस्ट रिच पर्नेल (astrodynamicist Rich Purnell ) ने एक अलग प्लान बनाया. उन्होंने सजेस्ट किया कि सीक्रेट बूस्टर वाला rocket Ares 3 की स्पेशशिप को रीसप्लाई करने में यूज़ करेंगे जोकि उस वक्त मार्स से धरती की तरफ लौट रही थी. इसके बाद ares 3 की स्पेशशिप को धरती की ग्रेविटी से स्लिंगशॉट करके वापस सप्लाई लेकर मार्स पर रेस्क्यू मिशन पर जायेंगे.
इस प्लान को सक्सेसफुल बनाने के लिए मार्क को मार्स की ऑर्बिट से बाहर आना पड़ेगा ताकि क्रू के मेम्बर उन तक पहुँच सके. दरअसल स्पेसशिप को मार्स पर लैंड करना पॉसिबल नहीं था इसलिए मार्क को किसी भी तरफ मार्स की ऑर्बिट के बाहर आना ही पड़ेगा. इसके लिए मार्क को ares 4 के vehicle जिसका नाम मार्स एसेंट vehicle था, उसे यूज़ करके ऑर्बिट से बाहर आना था. ये सब इतना आसान नहीं था पर मार्क के सामने यही एक रास्ता था जिंदा वापस आने
लेकिन नासा की टीम ने ये कहते हुए प्लान को मना कर दिया कि इसमें 5 और एस्ट्रोनॉट की जान खतरे में पड़ जाएगी और इतना बड़ा रिस्क लेने को नासा तैयार नहीं था.
पर इसके बावजूद नासा की एक ऑफिसर छुपकर ares 3 तक इस प्लान का मैसेज भेज देती है. क्रू मेंबर्स को जैसे ही ये पता चलता है तो वो बिना नासा की परमिशन लिए अपने स्पेसशिप का पाथ बदल देते है ताकि मार्क को बचाया जा सके. फाईनली नासा को भी उनके इस डिसीजन को पब्लिकली सपोर्ट करना पड़ता है. इसके बाद चाईना की हेल्प से स्पेसशिप रीसप्लाई के साथ एक बार फिर मार्स के सफर पर निकल पड़ता है.
मार्क को ये जानकर बेहद ख़ुशी होती है कि उसके क्रू मेंबर उसे बचाने आ रहे है. मार्क मार्स के ऑर्बिट से बाहर निकलने की तैयारी करने लगते है. उन्हें जैसे ही स्पेसशिप से सिग्नल मिलता है वो मार्स से निकल जाते है. लेकिन प्रेशर इतना ज्यादा होता है कि मार्क इस दौरान बेहोश हो जाते है और स्पेसशिप के साथ उनका कम्यूनिकेशन टूट जाता है. पर कुछ ही देर में उन्हें जब होश आता है तो वो फिर से कम्यूनीकेट करने की कोशिश करते है.
मार्क तक पहुंचने के लिए क्रू मेंबर्स को काफी मुश्किलें आ रही थी क्योंकि मार्क के vehicle और स्पेसशिप दोनों ही बड़ी तेज़ स्पीड में थे. क्रू मेंबर्स डिसाइड करते है कि वो स्पेसशिप का एक हिस्सा ब्लास्ट कर देंगे जिससे कि स्पीड कम हो जाए. मार्क कमांडर को मैसेज के जरिये प्लान शेयर करते है कि वो एयर प्रेशर कम करने के लिए अपने स्पेससूट में छेद कर देंगे जिससे कि वो स्पेशशिप के करीब आ सके. लेकिन कमांडर उन्हें ये कहते हुए मना कर देते है कि ये काफी रिस्की हो सकता है.
स्पेसशिप की स्पीड धीरे-धीरे कम होती है. अब कमांडर lewis स्पेसशिप से बाहर निकलकर फ्लाइंग चेयर पर बाहर निकल जाते है जोकि रस्सी के साथ स्पेसशिप से बंधी थी. कमांडर lewis को मार्क दिख जाते है पर उन तक पहुँचने के लिए रस्सी छोटी पड़ रही थी.
फाईनली मार्क अपने स्पेशसूट में होल करते है और vehicle को छोड़ देते है. स्पेससूट के हवा के प्रेशर से वो स्पेशशिप की तरफ बढ़ने लगते है और धीरे-धीरे कमांडर के पास पहुंच जाते है. कमांडर उन्हें अपना हाथ देते है. मार्क उसका हाथ पकड़ लेते है पर पकड़ ढीली पड़ जाती है तो उनका हाथ छूट जाता है.
पर खुशकिस्मती से मार्क के हाथ में फ़्लाईंग चेयर की रस्सी आ जाती है और वो सही-सलामत स्पेसशिप के अंदर चले जाते है.
आखिरकार मार्क अपने क्रू मेंबर्स के साथ धरती क्रू पर वापस लौटने में कामयाब रहते है और बाद में नासा के इंस्ट्रक्टर बन जाते है. उनका काम था एस्ट्रोनॉट को ट्रेनिंग देना. इसके साथ ही ये कहानी यहाँ पर खत्म होती है.
हमें उम्मीद है कि ये साइंस फिक्शन स्टोरी आपको अच्छी लगी होगी और आपने इसे एन्जॉय किया होगा.
👑… –GIGL
– Vishal
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